Google ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए IPIDEA नाम के खतरनाक रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क को डिसरप्ट कर दिया है। यह नेटवर्क Android और Windows डिवाइसेज़ को चुपचाप इस्तेमाल कर साइबर क्राइम को अंजाम दे रहा था। Google Threat Intelligence Group (GTIG) की इस कार्रवाई से लाखों यूज़र्स को संभावित खतरे से बचाया गया है।
क्या है IPIDEA Proxy Network?
IPIDEA एक ऐसा रेज़िडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क था, जो आम यूज़र्स के इंटरनेट कनेक्शन को बिना अनुमति के साइबर अपराधियों के लिए इस्तेमाल करता था। इस नेटवर्क के ज़रिए हैकर्स अपनी पहचान छिपाकर ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और अकाउंट हैकिंग जैसे काम कर रहे थे।
Android और Windows डिवाइस कैसे बन रहे थे शिकार?
IPIDEA नेटवर्क Android और Windows ऐप्स में छिपे मैलिशियस SDKs के ज़रिए काम करता था। ये SDKs अक्सर फ्री VPN, यूटिलिटी या अन्य सामान्य ऐप्स में मौजूद होते थे। जैसे ही यूज़र ऐप इंस्टॉल करता, उसका डिवाइस एक प्रॉक्सी नोड में बदल जाता और उसकी जानकारी के बिना इंटरनेट ट्रैफिक रूट किया जाने लगता था।
Google ने नेटवर्क को कैसे किया डिसरप्ट?
Google ने IPIDEA नेटवर्क के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए। कंपनी ने इस नेटवर्क से जुड़े डोमेन और कंट्रोल सर्वर को बंद कराया। इसके साथ ही Google Play Protect को अपडेट किया गया ताकि IPIDEA से जुड़े खतरनाक ऐप्स को Android डिवाइसेज़ पर ब्लॉक किया जा सके। Google ने सुरक्षा एजेंसियों और पार्टनर्स के साथ अहम जानकारी भी साझा की।

साइबर अपराध पर क्या पड़ा असर?
रिपोर्ट के मुताबिक IPIDEA नेटवर्क का इस्तेमाल सैकड़ों साइबर क्रिमिनल ग्रुप्स कर रहे थे। यह नेटवर्क पासवर्ड स्प्रे अटैक, डेटा चोरी और SaaS प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत एक्सेस जैसे हमलों में इस्तेमाल हो रहा था। Google की कार्रवाई से इन हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ा झटका लगा है।
यूज़र्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
यूज़र्स को हमेशा भरोसेमंद स्रोत से ही ऐप्स डाउनलोड करने चाहिए। खासतौर पर फ्री VPN या नेटवर्क से जुड़े ऐप्स इंस्टॉल करते समय सावधानी जरूरी है। डिवाइस में Play Protect या सिक्योरिटी फीचर्स को ऑन रखना और समय-समय पर सिस्टम अपडेट करना भी बेहद जरूरी है।
मेरी राय
Google द्वारा IPIDEA Proxy Network को डिसरप्ट करना साइबर सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे Android और Windows यूज़र्स को राहत मिली है और यह साफ संकेत है कि टेक कंपनियां अब साइबर अपराध के खिलाफ और सख्ती से कदम उठा रही हैं।
यह भी पढ़ें: Airtel बनाम Jio प्लान: सिर्फ ₹1 का फर्क, फायदे जमीन-आसमान – कौन है बेस्ट?








