भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Sarvam AI ने हाल ही में अपने दो नए एडवांस्ड AI मॉडल Sarvam Vision और Bulbul V3 को लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि ये दोनों मॉडल खास तौर पर भारतीय यूज़र्स की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
Sarvam Vision भारतीय भाषाओं में लिखे टेक्स्ट को पहचानने यानी OCR (Optical Character Recognition) के काम में काफी बेहतर है, जबकि Bulbul V3 वॉइस से जुड़े टास्क जैसे स्पीच रिकग्निशन और वॉइस प्रोसेसिंग में शानदार परफॉर्मेंस देता है।
Sarvam AI का दावा है कि ये नए मॉडल भारतीय भाषाओं को समझने और प्रोसेस करने में Google Gemini और OpenAI के ChatGPT जैसे ग्लोबल AI सिस्टम्स से भी बेहतर रिज़ल्ट देते हैं। कंपनी का मानना है कि ये टेक्नोलॉजी भारत में डिजिटल सेवाओं, सरकारी कामकाज और लोकल बिज़नेस के लिए एक एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी।
Sarvam Vision: भारतीय भाषाओं के लिए खास OCR मॉडल
Sarvam Vision एक विज़न-बेस्ड AI मॉडल है, जिसे खासतौर पर भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट पहचान के लिए विकसित किया गया है। यह मॉडल स्कैन किए गए डॉक्यूमेंट, इमेज और मुश्किल लेआउट को पढ़ने में सक्षम है। कंपनी के अनुसार, इंटरनेशनल OCR बेंचमार्क टेस्ट में Sarvam Vision ने हिंदी, तमिल, बंगाली और अन्य भारतीय भाषाओं में बेहतर सटीकता दिखाई है।
जटिल डॉक्यूमेंट पढ़ने में बेहतर प्रदर्शन
Sarvam AI का कहना है कि Sarvam Vision उन डॉक्यूमेंट्स को भी आसानी से पढ़ सकता है, जिनमें टेबल, चार्ट और अलग-अलग फॉन्ट इस्तेमाल किए गए हों। यही वजह है कि यह मॉडल सरकारी दस्तावेज़ों और क्षेत्रीय भाषा कंटेंट के लिए ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है।

Bulbul V3: भारतीय भाषाओं के लिए नया वॉइस AI
Bulbul V3 Sarvam AI का नया टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल है, जिसे भारतीय भाषाओं और स्थानीय उच्चारण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह मॉडल पहले के वर्ज़न की तुलना में ज्यादा नैचुरल और स्थिर आवाज़ जनरेट करता है।
स्थानीय लहज़ों और कोड-मिक्स भाषा को सपोर्ट
Bulbul V3 अलग-अलग भाषा, लहज़े और कोड-मिक्सिंग जैसे हिंदी-अंग्रेज़ी कंटेंट को बेहतर तरीके से समझ सकता है। इससे यह एजुकेशन, डिजिटल मीडिया और कस्टमर सपोर्ट जैसे सेक्टर्स के लिए ज्यादा प्रभावी बन जाता है।
भारतीय AI इकोसिस्टम के लिए क्या है मायने
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Sarvam AI जैसे स्टार्टअप भारत में लोकल लैंग्वेज AI को नई पहचान दिला सकते हैं। भारतीय भाषाओं पर फोकस करने वाले ऐसे मॉडल डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस जैसी पहलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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