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Huawei Watch GT 6 Pro ने मचाई हलचल, अब घड़ी बताएगी डायबिटीज़ का रिस्क!

By Afreen Bano

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Huawei Watch GT 6 Pro: हेल्थ और वियरेबल टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नया प्रयोग चर्चा में है। दुबई में आयोजित वर्ल्ड हेल्थ एक्सपो 2026 के दौरान Huawei की नई Huawei Watch GT 6 Pro को डायबिटीज़ रिस्क डिटेक्शन ट्रायल में शामिल किया गया है। दावा यह है कि यह स्मार्टवॉच यूज़र के शरीर से मिलने वाले बायोसिग्नल्स के आधार पर डायबिटीज़ के खतरे के शुरुआती संकेत पहचानने में मदद कर सकती है। अगर यह ट्रायल सफल रहता है तो आने वाले समय में स्मार्टवॉच सिर्फ फिटनेस गैजेट नहीं बल्कि पर्सनल हेल्थ मॉनिटरिंग टूल बन सकती है।

क्लीनिकल ट्रायल मोड में चल रही है टेस्टिंग

यह फीचर सिर्फ लैब लेवल कॉन्सेप्ट नहीं बल्कि रियल यूज़र्स पर टेस्ट किया जा रहा है। ट्रायल में अलग-अलग हेल्थ कंडीशन वाले प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, कुछ पूरी तरह स्वस्थ, कुछ प्री-डायबिटिक और कुछ पहले से डायबिटीज़ पेशेंट। रिसर्च का मकसद वॉच से मिलने वाले रीडिंग पैटर्न को पारंपरिक ब्लड ग्लूकोज टेस्ट से तुलना करना है, ताकि यह समझा जा सके कि रिस्क डिटेक्शन कितना भरोसेमंद है।

बिना ब्लड सैंपल के काम करने वाली टेक्नोलॉजी

Huawei Watch GT 6 Pro में ऑप्टिकल PPG सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह सेंसर स्किन के नीचे ब्लड फ्लो और माइक्रो सर्कुलेशन सिग्नल को पढ़ता है। इन डेटा पॉइंट्स को AI एल्गोरिद्म प्रोसेस करते हैं और शुगर लेवल से जुड़े संभावित रिस्क पैटर्न का अनुमान लगाते हैं। पूरी प्रक्रिया नॉन-इनवेसिव है, यानी न सुई, न स्ट्रिप, न ब्लड सैंपल की ज़रूरत पड़ती है सिर्फ कलाई पर पहनी वॉच से पात चल जाएगा।

डायरेक्ट डायग्नोसिस नहीं, अर्ली अलर्ट सिस्टम

कंपनी और रिसर्च टीम साफ कर चुकी है कि यह वॉच डायबिटीज़ का मेडिकल कन्फर्मेशन नहीं देगी। इसका काम एक अर्ली अलर्ट सिस्टम की तरह है। अगर डेटा में बार-बार असामान्य पैटर्न दिखते हैं तो यूज़र को मेडिकल टेस्ट कराने और डॉक्टर से सलाह लेने का संकेत मिल सकता है। यानी इसे इलाज के विकल्प की तरह नहीं बल्कि स्क्रीनिंग टूल की तरह देखा जा रहा है।

Huawei Watch GT 6 Pro

हेल्थ वियरेबल मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

अगर यह टेक्नोलॉजी व्यावहारिक रूप से सफल साबित होती है तो वियरेबल मार्केट में बड़ा बदलाव आ सकता है। अभी तक स्मार्टवॉच हार्ट रेट, ECG, SpO2 और स्लीप ट्रैकिंग तक सीमित थीं, लेकिन ग्लूकोज रिस्क एनालिसिस जुड़ने से यह कैटेगरी एक कदम आगे निकल जाएगी। इससे दूसरी कंपनियाँ भी एडवांस हेल्थ सेंसर और AI-आधारित फीचर पर तेजी से काम बढ़ा सकती हैं।

Watch GT 6 Pro: यूज़र के लिए क्या मतलब है

आने वाले समय में यूज़र को रोजमर्रा की हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए बार-बार टेस्ट कराने की जरूरत कम हो सकती है। कलाई पर मौजूद डिवाइस ही लगातार डेटा पढ़कर रिस्क संकेत दे सकेगी। हालांकि फाइनल मेडिकल डिसीजन अभी भी लैब टेस्ट और डॉक्टर की सलाह पर ही आधारित रहेगा, लेकिन अर्ली सिग्नल मिलना ही कई मामलों में बड़ी बचत साबित हो सकता है।

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Afreen Bano

मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर और मास कम्युनिकेशन में पोस्टग्रेजुएट हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, खासकर स्मार्टवॉच और लैपटॉप जैसे गैजेट्स पर लिखना पसंद है। मेरा उद्देश्य है कि टेक्नोलॉजी से जुड़ी जटिल जानकारियों को आसान, स्पष्ट और उपयोगी भाषा में आम पाठकों तक पहुँचाया जाए। लेखन के माध्यम से मैं तकनीक को समझने और अपनाने की प्रक्रिया को सरल और रोचक बनाना चाहती हूँ।

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