Google ने हाल ही में मान ही लिया कि ओपन वेब तेज़ी से गिरावट की ओर बढ़ रहा है। कंपनी की ओर से यह बयान उस समय आया है जब वे लंबे समय से कह रहे थे कि AI फीचर्स गूगल सर्च ट्रैफिक पर कोई असर नहीं डाल रहे।
बता दें कि कंपनी ने इसे एक अमेरिकी अदालत में चल रहे रेमेडियल ट्रायल के दौरान स्वीकारा। यह वही ट्रायल है, जिसमें Google के एड-टेक बिज़नेस का हिस्सा बेचने को लेकर फैसला होना है। कंपनी का यह नया बयान सीधे तौर पर उसके पहले के दावों का खंडन करता है।
क्या है Google का नया बयान और ट्रायल का पूरा मामला
Google इस समय यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के साथ एक कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। दरअसल DoJ चाहता है कि Google अपने एड-टेक बिज़नेस का एक हिस्सा अलग कर दे। इसी दौरान कंपनी ने कोर्ट में कहा कि ओपन वेब पहले से ही गिरावट में है और डिवेस्टमेंट का दबाव इस गिरावट को और बढ़ा सकता है।
Google के पहले और अब के बयान में अंतर
पहले, Google की वाईस प्रेसिडेंट एलिज़ाबेथ रीड ने दावा किया था कि AI मोड, वेबसाइट ट्रैफिक नहीं खींच रहा। और कंपनी का ऑर्गेनिक क्लिक वॉल्यूम स्थिर है। साथ ही थर्ड-पार्टी रिपोर्ट्स की पद्धतियाँ को पूरी तरह गलत और अधूरी बताई थीं। लेकिन कोर्ट में दिए गए ताज़ा बयान में Google ने साफ स्वीकारा कि ओपन वेब गिरावट में देखने को मिल रही है और पब्लिशर्स की डिस्प्ले ऐड रेवेन्यू खतरे में है।
Google Ads के वाइस प्रेसीडेंट डैन टेलर ने बाद में स्पष्ट किया कि जब Google ने ओपन वेब के गिरावट की बात की, तो उसका मतलब पूरे वेब से नहीं बल्कि ओपन वेब डिस्प्ले एडवरटाइजिंग से था। कंपनी का कहना है कि विज्ञापन बजट समय के साथ अब बदल रहे हैं । लोग टीवी, रिटेल मीडिया और दूसरी नई जगहों पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं।

इसी बीच, सिमिलरवेब की एक रिपोर्ट में सामने आया कि जून 2024 में वैश्विक सर्च ट्रैफिक 15 प्रतिशत तक घट गया। इससे साफ़ है कि इंटरनेट पर यूज़र का व्यवहार तेजी से बदल रहा है। वेबसाइट्स को अब पहले जितना ट्रैफिक नहीं मिल रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि खास कर न्यूज़ वेबसाइट्स पर ज़ीरो क्लिक रेट है। यूज़र सिर्फ पेज देखते हैं लेकिन उस पर क्लिक नहीं करते। मई में जीरो क्लिक रेट 56 प्रतिशत से बढ़कर 69 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह इस बात की ओर संकेत है कि लोग पहले से कम क्लिक कर रहे हैं। वो पूरी जानकारी गूगल या दूसरे प्लेटफॉर्म पर ही ले लेते हैं।
Google का अपने ही पुराने बयानों से पलटने पर एक बात साफ़ है कि AI और सर्च के नए दौर में पारंपरिक वेब मॉडल टिकने के लिए संघर्ष कर रहे है। अब आने वाले समय में इसका असर ऐड इंडस्ट्री और यूज़र्स पर देखने को मिल सकता है।
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