YouTube ने अपने लंबे समय से टेस्ट किए जा रहे Multi-Language Audio फीचर को आखिरकार दुनियाभर के सभी क्रिएटर्स के लिए लॉन्च कर दिया है। इस फीचर की खासियत यह है कि क्रिएटर्स अब एक ही वीडियो में कई भाषाओं के ऑडियो ट्रैक जोड़ सकते हैं। अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग-अलग चैनल बनाने या बार-बार वही वीडियो अपलोड करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। यह अपडेट खासतौर पर भारत जैसे मल्टी-लिंगुअल मार्केट्स के लिए उतारा गया है, जहाँ अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट की डिमांड लगातार बढ़ रही है। आइए Multi-Language Audio के फीचर्स और फायदे से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से समझाते हैं….
Multi-Language Audio फीचर कैसे करेगा काम?
इस फीचर का इस्तेमाल करके क्रिएटर्स अब अपने वीडियो में कई अलग-अलग भाषाओं के ऑडियो ट्रैक जोड़ सकेंगे। बता दें कि इसमें ऑटो-डबिंग की सुविधा नहीं है बल्कि क्रिएटर्स को मैन्युअली अलग-अलग ऑडियो रिकॉर्ड करके जोड़ना होगा। इसे जोड़ने के लिए YouTube के Subtitles Editor टूल का उपयोग करना होगा। दर्शक सबसे पहले वीडियो के Settings में जाएँ फिर वहाँ से Audio Track ऑप्शन में जाकर अपनी पसंदीदा भाषा चुन सकते हैं। जानकारी के लिए बता दें, डिफ़ॉल्ट रूप से YouTube वीडियो को यूज़र की प्रिफरेंस्ड लैंग्वेज में मैच करेगा।
किन क्रिएटर्स ने पहले इस्तेमाल किया?
Multi-Language Audio फीचर 2023 से पायलट टेस्टिंग में था। MrBeast, Mark Rober, Jamie Oliver और Nick DiGiovanni जैसे बड़े क्रिएटर्स इसका इस्तेमाल पहले से करते आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Jamie Oliver की व्यूअरशिप इस फीचर के बाद तरकीबन 3 गुना बढ़ गई।
क्या फायदे होंगे क्रिएटर्स को?
एक ही वीडियो में अलग-अलग भाषा का ऑडियो जोड़ने से ग्लोबल ऑडियंस तक पहुंच बढ़ेगी। YouTube का दावा है कि ऐसे वीडियो में से 25% वॉच टाइम नॉन-प्राइमरी भाषा से आया। इसलिए माना जा रहा ही कि इससे सब्सक्राइबर्स और व्यूज़ दोनों बढ़ने की संभावना है।

मल्टी-लैंग्वेज थंबनेल टेस्ट भी शुरू
Youtube अब मल्टी-लैंग्वेज थंबनेल का टेस्ट भी कर रहा है। इससे क्रिएटर्स अपनी वीडियो थंबनेल को लोकलाइज़्ड टेक्स्ट और डिज़ाइन के साथ एडजस्ट करने सकेंगे। ऐसे में हर भाषा के ऑडियंस को पहली से ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड एक्सपीरियंस मिल सकता है।
YouTube का Multi-Language Audio फीचर क्रिएटर्स के लिए बहुत कुछ नया ले कर आ रहा है। अब एक ही वीडियो से कई भाषाओं के दर्शकों तक पहुंच सकते हैं। भारत जैसे देश में जहाँ पर हिंदी, तमिल, बंगाली, मराठी जैसी कई भाषाओं में ऑडियंस की बड़ी डिमांड रहती है। मल्टीलिंगुअल देश में यह फीचर पॉपुलर हो सकता है। ध्यान रहे कि डबिंग ऑटोमैटिक नहीं है। इसके लिए क्रिएटर्स को खुद से अलग-अलग ऑडियो ट्रैक रिकॉर्ड करने होंगे।
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