kya sach mein band ho raha hai OnePlus?: स्मार्टफोन कंपनी वनप्लस के भविष्य को लेकर अफवाहों का बाजार काफी सुर्खियों में हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने यह दावा किया है कि, वनप्लस के शेयर में पेरेंट कंपनी ओप्पो की हिस्सेदारी बढ़ा सकती है और उसके प्रोडक्ट्स को भी पहले की अपेक्षा सीमित किया जा सकता है।
लेकिन, वनप्लस इंडिया ने फिलहाल यह साफ कर दिया है कि, वह भारत में अपने ऑपरेशन को पहले की तरह ही जारी रखेगी। वनप्लस में इस बदलाव को लेकर सबसे पहले Android Headlines ने रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया था कि, वनप्लस को अब धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ प्रोडक्ट कैंसिल होने के साथ-साथ कंपनी के बारे में फैसले सेंट्रल टीम द्वारा लिए जा रहे हैं।
कुछ ऐसी ही रिपोर्ट Android Central ने भी प्रकाशित की है, जिसमें यह कहा गया था कि वनप्लस को पूरी तरह शटडाउन नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके कारोबार को थोड़ा कम किया जा सकता है।
OnePlus के शिपमेंट में गिरावट
Android Headlines की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2024 में वनप्लस के शिपमेंट में तेजी से गिरावट देखने को मिली, जिसके बाद कंपनी ने कई प्रोडक्ट्स को बाद में कैंसिल भी कर दिया, जिसमें वनप्लस का फोल्डेबल फोन OnePlus Open 2 और फ्लैगशिप OnePlus 15s जैसे डिवाइस शामिल थे।
इस रिपोर्ट में यह भी जानकारी मिली है कि, OnePlus ने यूएस और यूरोप में अपने दफ्तरों के स्टाफ में भी काफी कटौती कर रही है। इसी के साथ ही कंपनी के बारे में ज्यादातर फैसले स्थानीय दफ्तरों की बजाय चीन से लिए जा रहे है। रिपोर्ट में यहां तक यह भी दावा किया गया है कि, ओप्पो ने कुछ ऐसा ही रियलमी के साथ भी किया था। संभव है कि यह कॉस्ट कटिंग और कंपनी ऑपरेशन को नॉर्मल करने के लिए किया जा रहा हो।
वनप्लस को लेकर कुछ ऐसा ही दावा जी
OnePlus को लेकर ओप्पो की इस रणनीति को चीन और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड-वार से भी कहीं न कहीं जोड़ा जा रहा है। अमेरिकी बाजार के उलट भारत को लेकर कंपनी की रणनीति अलग अब रहेगी। इसे लेकर वनप्लस इंडिया के सीईओ रॉबिन ली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि, वनप्लस इंडिया का कारोबार पहले की तरह थोड़ा सामान्य रूप से चलेगा। उन्होंने वनप्लस के बंद होने की अटकलों पर विराम लगाने की पूरी कोशिश की है।
IDC के रिसर्च मैनेजर जितेश उब्रानी का कहना है कि उन्हें वनप्लस के बंद होने की अभी तक कोई भी जानकारी नहीं मिली है। लेकिन वे यह भी मानते हैं कि मार्केट में कंपनी की घटती हिस्सेदारी, मार्केटिंग के खर्च में कमी और मार्केट से कंपनी की दूसरी धीरे-धीरे कंपनी को शटडाउन के काफी पास ला रहा है।
इसी के साथ उन्होंने यह भी जानकारी दी कि, एक ओर सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियां फ्लैगशिप स्मार्टफोन के साथ-साथ अफोर्डेबल प्रीमियम डिवाइस पर ध्यान दे रही हैं तो दूसरी ओर वनप्लस नए प्रोडक्ट्स को पहले की अपेक्षा सीमित कर रहा है। जिसे कंपनी की मार्केट में हिस्सेदारी लगातार कम देखने को मिल रही है।

वनप्लस इंडिया का क्या होगा?
OnePlus के बंद होने की खबरों के बीच कंपनी ने साफ एक दम से स्पष्ट कर दिया है कि, इंडिया ऑपरेशन पहले की तरह सामान्य चलते रहेगा। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इस तरह की खबरों को गलत बताते हुए भी खंडन किया है। लेकिन, वनप्लस ने इन रिपोर्ट्स में उठाए सवालों के जवाब सही और साफ तरीके से नहीं दिया है।
लेखक की राय
OnePlus को लेकर जो खबरें सामने आ रही हैं, उन्हें पूरी तरह “कंपनी बंद” होने के नजरिये से देखना सही नहीं होगा। मौजूदा हालात यह जरूर दिखाते हैं कि वनप्लस अब पहले जैसी आक्रामक रणनीति पर काम नहीं कर रही है। प्रोडक्ट्स की संख्या कम करना, कुछ डिवाइस कैंसिल करना और मार्केटिंग खर्च घटाना इस बात का संकेत है कि कंपनी कॉस्ट कंट्रोल और री-स्ट्रक्चरिंग के दौर से गुजर रही है।
ओप्पो की बढ़ती दखलअंदाजी से यह साफ है कि वनप्लस की स्वतंत्र पहचान पहले से कमजोर हुई है। कभी “फ्लैगशिप किलर” कहलाने वाली कंपनी अब सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ती नजर आ रही है। खासकर प्रीमियम सेगमेंट में नए और इनोवेटिव प्रोडक्ट्स की कमी यूजर्स को निराश कर सकती है।
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